अनकही बातें !

 रिश्ते अक्सर बड़ी गलतियों से नहीं, छोटी-छोटी गलतफहमियों से टूटते हैं।


दो लोग एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं, फिर भी कभी-कभी हालात ऐसे बन जाते हैं कि एक को लगता है—

“तुम मुझे प्रायोरिटी नहीं देते… तुम मुझे समय पर कुछ नहीं बताते…”


लेकिन सच यह है कि कई बार दूसरा इंसान जानबूझकर कुछ गलत नहीं करता।


ज़िंदगी तेज़ चलती है।

कभी अचानक कोई इमरजेंसी आ जाती है।

कभी हम एक कॉल पर होते हैं और दूसरी कॉल आ जाती है।

कभी हम कहना भूल जाते हैं, “रुको, कोई कॉल आ रही है।”

कभी गलती से कॉल कट हो जाती है।

कभी प्लान आख़िरी समय पर बदल जाते हैं।


लेकिन सामने वाला यह सब नहीं देख पाता।

उसे सिर्फ़ नतीजा दिखता है—

“तुमने मुझे नहीं बताया।”

“तुमने मुझे नहीं चुना।”

“तुम हमेशा ऐसा करते हो।”


और धीरे-धीरे छोटी बातें बड़े घाव बन जाती हैं।


एक पार्टनर जल्दी माफ़ कर देता है।

दूसरा देर तक दिल में रख लेता है।

एक समझाने की कोशिश करता है।

दूसरा खुद को अनदेखा महसूस करता है।


और फिर दोनों थक जाते हैं।


लेकिन सच्चाई बहुत सीधी है:

हर गलती प्यार की कमी नहीं होती।

हर देरी प्रायोरिटी की कमी नहीं होती।

कभी-कभी बस हालात ऐसे बन जाते हैं।


रिश्ते तब चलते हैं जब दोनों इंसान यह समझें कि इंसान परफेक्ट नहीं होते।

हम भूल जाते हैं।

हम व्यस्त हो जाते हैं।

हमसे गलती हो जाती है।

लेकिन दिल में प्यार फिर भी होता है।


दूरी तब खतरनाक बनती है जब हम एक-दूसरे को समझना छोड़ देते हैं।

जब हम दिल की नीयत पर भरोसा करना छोड़ देते हैं।

जब हम पूछने की जगह मान लेते हैं कि सामने वाला गलत है।


कभी-कभी रिश्ते को बस एक लाइन बचा लेती है—

“मुझे पता है तुमने जानबूझकर नहीं किया।”


क्योंकि प्यार परफेक्शन नहीं,

प्यार धैर्य है।

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